| तू जवळ असलास की |
| माझं मलाच कळत नाही |
| इतक्या मायेने, इतक्या प्रेमाने |
| आनंद कधीच कुरवाळत नाही |
| तू जवळ असलास की |
| स्वर्ग धरतीवर स्वार होतो |
| चांदण्यांचा एक थवा |
| घरटं बांधण्यासाठी तयार होतो |
| तू जवळ असलास की |
| स्पर्श खूप बोलका होतो |
| तू हात गुंतवतोस केसात नि |
| अतृप्त मनाचा भार हलका होतो |
| तू जवळ असलास की |
| तुझ्या डोळ्यातील भाव वेचत राहते |
| एक अनामिक ओढ नकळत |
| मला तुझ्यापाशी खेचत राहते |
| तू जवळ असलास की |
| माझा प्रत्येक क्षण मोहरतो |
| तू अलगद मिठीत घेतोस |
| माझा उभा देह शहारतो |
| तू जवळ असलास की |
| माझं मला काहीचं माहित नसते |
| रात्रभर मग गुपीत वाचते |
| जे साचलं मनाच्या वहीत असते |
| तू जवळ असलास की |
| विचार भावनांपुढे नमतं घेतात |
| माझं तुझ्यासवे मुक्त विहरणं |
| त्या गोष्टीची ग्वाही देतात |
| तू जवळ असलास की |
| मला वेडं लागणं निश्चीत असते |
| काही क्षण का होईना |
| माझं शहाणपण उपेक्षीत असते |
| तुझ्यामुळेच तर माझ्या गाली |
| एक खळी खुलली आहे |
| तुझ्यामुळेच तर फूल होवून |
| एक कळी फुलली आहे |
| तुझ्यामुळेच तर जिवनात |
| रोज दसरा नि दिवाळी आहे |
NiKi
Wednesday, February 1, 2012
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